Rajiv Chowk Master Plan : दिल्ली-सोहना हाईवे को जोड़ने के लिए बनेंगे एलिवेटेड रैंप, जानें क्या है पूरा मास्टरप्लान
दिल्ली से सोहना हाईवे पर जाने के लिए वाहनों को सर्विस लेन का सहारा लेना पड़ता है, जहाँ भारी भीड़ के कारण महज कुछ मीटर की दूरी तय करने में 20 से 30 मिनट का समय लग जाता है।

Rajiv Chowk Master Plan : साइबर सिटी गुरुग्राम के सबसे व्यस्त और चुनौतीपूर्ण जंक्शनों में से एक राजीव चौक पर ट्रैफिक जाम की समस्या अब इतिहास बनने जा रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने संयुक्त रूप से एक क्रांतिकारी योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे (NH-48) और गुरुग्राम-सोहना हाईवे को सीधे जोड़ने के लिए नए एलिवेटेड रैंप बनाए जाएंगे।
बुधवार को जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीना की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। योजना के अनुसार, दो मुख्य एलिवेटेड रैंप का निर्माण किया जाएगा। दिल्ली से सोहना की ओर दिल्ली की दिशा से आने वाले वाहनों के लिए ताऊ देवी लाल स्टेडियम के ऊपर से एक एलिवेटेड रैंप बनाया जाएगा, जो सीधे सोहना हाईवे पर उतरेगा। सोहना से दिल्ली की ओर: सोहना हाईवे से आने वाले वाहनों के लिए BSNL कैंपस के ऊपर से रैंप बनाया जाएगा, जिससे वाहन बिना राजीव चौक के ट्रैफिक में फंसे सीधे दिल्ली एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे।

इस प्रोजेक्ट में एक तीसरा रैंप भी प्रस्तावित है। मेदांता मेडिसिटी की ओर से आने वाले ट्रैफिक को सीधे गुरुग्राम-सोहना हाईवे पर भेजने के लिए एक लिंक रैंप बनाया जाएगा। यह रैंप मुख्य दिल्ली-सोहना रैंप के साथ जुड़ेगा, जिससे अस्पताल क्षेत्र से आने वाली गाड़ियों को राजीव चौक के सर्विस लेन में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वर्तमान में, दिल्ली से सोहना हाईवे पर जाने के लिए वाहनों को सर्विस लेन का सहारा लेना पड़ता है, जहाँ भारी भीड़ के कारण महज कुछ मीटर की दूरी तय करने में 20 से 30 मिनट का समय लग जाता है। नए रैंप बनने के बाद यह दूरी केवल एक मिनट में तय की जा सकेगी।
परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने के लिए अगले 15 दिनों के भीतर पाइपलाइन, बिजली के तार और टेलीफोन केबल्स का सर्वे किया जाएगा। इन यूटिलिटीज को शिफ्ट करने के बाद निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जाएगी। बैठक में NCRTC, BSNL और बिजली निगम के अधिकारियों ने भी इस समाधान को फ्लाईओवर या अंडरपास से बेहतर बताया है।











